zinda dili
इरादा तुम्हारा था जाने का फिर तो
कहो फिर से कैसे ठहर गए तुम
ज़हालत की यूं तो थी ऊंची दीवारें
बताओ तो कैसे निकल गए तुम
"गुनाह" नहीं हैं तुम्हारे ये माना
तो क्यूं कह रहे हो "सुधर" गए तुम
मिलाई जो आंखें सनम आज ख़ुद से
कहो आईने से क्यूं डर गए तुम
मुझे था उठाने का वादा किया तो
मुझे ही गिरा क्यूं संवर गए तुम
मुझे था हंसाने का वादा किया तो
मुझे ही रुला क्यूं मुकर गए तु
तुम ही जमीं होते तुम ही दीवारें
मगर छोड़ दिल का महल गए तुम
तुमने कहा था जो बदले वो "काफिर"
कहो आज कैसे "बदल" गए तुम??
Awesome 👍👍
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